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जिनराया मेरा मन भाया

जिनराया मेरे मन भाया । 
तुम बिन कोई न दिल भाया ॥ 
तू सब दुःख को हरता है 
मोक्ष का मालिक कर्ता है 

भाया वीर भजले...

वीर भजले रे भाया वीर भजले  
जरा सी ओहो। .. थोड़ी सी केहणो  म्हारो मान 
भाया वीर 
मुट्टी बांध्यो आयो रे भाईडा , हाथ पसारयो जासी 

मोरा तो मन बस हर लियो रे

मोरा तो मन हर लियो रे प्रभु तोरी मुरतीया 
आये नजर नही जग मे– रे कोई ऐसी सुरतीया 
मोरा तो मन 
तोरे दरश बिन जियरा न माने 

प्यारे दादा

अजमेर वाले दादा दादा तेरी जय जयकार  
जय जयकार  
तुने मुझे प्यारे दादा 

मैं  आया में प्यारे दादा 

अर्जी सुनो हम लाये

हे शंखेश्वर पार्श्व जिनेश्वर, अर्जी सुनो हम लायें। 
अर्जी सुनो हम लायें 
हे शंखेश्वर 
नाव पुरानी हैं, पार लगानी है 

म्हारी चंदन बाई रो बीरो

स्थाई 
कठासु आयो मोती कढासु आयो हिरो 
ठा भयो हे म्हारी चंदन बाई रो बीरो 
शत्रुंजय सु आयो मोती 

मानुष तन पा करके

स्थाई 
मानुष तनपा करके कभी न मन करे अभिमान 
दिल में बसाले भगवान 
धन का भरोसा क्या, कब लूट जायेगा 

करता हूँ वंदना मोक्षगामी

करता हूँ वन्दना मोक्षगामी 
रह न जाये कोई मेरी साध स्वामी प्रभु पार्श्व स्वामी 
करता हूँ वन्दना 
में तो आया हूँ आस लगाके अब जाऊँगा दर्शन पाके 

मैं नही सुख में कभी तुम्हे याद

मैं नहीं सुख में कभी तुम्हें याद करता हूं 
बस बड़ा भारी यहीं अपराध करता हूँ 
मैं नही 
हूँ सदा करता रहा दुर्ध्यान हर घड़ी

जपलो पारस ने हो...

थारों जनन मरण मिट जासी 
थाने श्रसु पार लागासी 
जीवड़ी आतम पद पा जास 
जपलो पारस ने हो ..