स्थूलिभद्र और कोशा नर्तकी की कथा एक प्रेरक प्रसंग है, जिसमें भोग-विलास से वैराग्य की ओर यात्रा दिखाई गई है। युवावस्था में कोशा संग जीवन बिताने वाले स्थूलिभद्र ने पिता की मृत्यु से जागृति पाई और दीक्षा ली।
जूनागढ़ के निकट स्थित गिरनार पर्वत भगवान नेमिनाथ की दीक्षा, केवलज्ञान और निर्वाण भूमि है। १०,००० सीढ़ियों की यात्रा पाँच पवित्र टूंक और १६ भव्य मंदिरों से होकर गुजरती है। जैन और हिंदू परंपराओं का अद्भुत संगम, गिरनार शताब्दियों से श्रद्धा और सहिष्णुता का जीवंत प्रतीक है।