आंख सुबह को जब मैं खोलूंसबसे पहले तू दिख जाए तुझसे पहले चांद को देखूंऐसी कोई शाम ना आए सुनवीर
हे अविनाशी ! नाथ निरंजन ! साहिब मारो साहिब साचो; हे शिववासी! तत्त्वप्रकाशी! साहिब मारो साहिब साचो ।