प्रेक्षा ध्यान आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा विकसित एक अद्वितीय ध्यान पद्धति है। इसका उद्देश्य है, आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और जीवन में समता का विकास। यह ध्यान अनुप्रेक्षा (गहन चिंतन) और स्व-पर्यवेक्षण पर आधारित है। विश्वभर में इसे शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उत्थान के साधन के रूप में अपनाया गया...
जैन धर्म में अष्ट प्रकारी पूजा आठ अर्घ्यों से सम्पन्न होती है, जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीपक, नैवेद्य, फल और आरती। हर अर्घ्य आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक है। पूजा का उद्देश्य बाहरी अर्पणों के माध्यम से आंतरिक साधना को जागृत करना है।