अनेकांतवाद जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है, जो सत्य को अनेक दृष्टिकोणों से देखने की शिक्षा देता है। यह विचार हमें बताता है कि किसी भी वस्तु या सत्य को केवल एक ही दृष्टि से नहीं समझा जा सकता। "अंधगज न्याय" जैसी कहानियाँ इसके व्यावहारिक महत्व को सरलता से समझाती हैं। आज के समय में यह सिद्धांत सहिष्ण...
स्थूलिभद्र और कोशा नर्तकी की कथा एक प्रेरक प्रसंग है, जिसमें भोग-विलास से वैराग्य की ओर यात्रा दिखाई गई है। युवावस्था में कोशा संग जीवन बिताने वाले स्थूलिभद्र ने पिता की मृत्यु से जागृति पाई और दीक्षा ली।