जैन धर्म में 24 तीर्थंकरों की दिव्य महिमा का वर्णन किया गया है। प्रत्येक तीर्थंकर ने मोक्षमार्ग का उपदेश देकर जीवों को सत्य और अहिंसा की ओर प्रेरित किया। उनकी जीवनकथाएँ त्याग, तपस्या और करुणा का आदर्श प्रस्तुत करती हैं। 24 तीर्थंकरों की स्तुति आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की साधना का मार्ग प्रशस्त करती है।
पर्युषण पर्व जैन धर्म का सर्वोच्च और पवित्र उत्सव है। यह आत्मशुद्धि, तपस्या और क्षमा का महापर्व माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान उपवास, स्वाध्याय और सामायिक का पालन करते हैं। पर्युषण का मुख्य संदेश है क्षमा, करुणा और आत्मिक उत्थान।