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ये प्यासा है ...

दिल दिवाना प्रभु भक्ति बिन मानेना 
ये प्यासा है बिन दर्शन मानेना !
दिल ये चाहे प्रभु भक्ति में लीन आज हो जाऊ 
सत्य अहिंसा के नियमों पर में चलता ही जाऊ 

मुख से प्रभु नाम को लेता जा

मुख से प्रभु नाम को लेता जा 
जा तुझको स्वर्ग का द्वार मिले 
कंटकमय पथ से बच जाये 
मुक्ती का टिकट तैय्यार मिले ॥धृ॥ 

ऐऊ मांगु छू

भक्ती करता छुटे म्हारा प्राण प्रभुजी ऐऊ मांगू छू 
रहे जन्म जन्म थारो साथ प्रभुजी ऐऊ मांगू छू !! 
यारो मुखड़ो मनोहर ज्योया करू 
रात दिवस रटन बारो करीया करू 

जीवन में हो ऐसी घडी

जीवन में हो ऐसी घड़ी
मन में बस जाये मुरत तेरी 2
ये जीवन है दर्शन का प्यासा
प्यास बुझती हैं कब तक मेरी 2

गुरु वंदना

गुरुदेव ! तुम्हे नमस्कार बार बार हैं
श्रीचरण शरण से हुआ, जीवन सुधार है ।।गुरुदेव।। 
अज्ञान - तम हटाके ज्ञान ज्योति जगा दी
दृढ आत्मज्ञान में अखण्ड दृष्टी लगा दी

निश दिन सुमरो रे नवपद माला

निश दिन सुमरो रे नवपद माला
कर्म का टूटे पल में ताला ॥ धू ॥
सुमिरन इस जीवन में दुख हर लेगा। 
इक दिन चौरसी का सुख हर लेगा

करले - करले रे दर्शनिया

करले - करले रे दर्शनिया पाश्र्वं प्रभु की
तोरे कमों की बंधनिया, टूटे रे बावरीया  २
पार्श्वनाथ की प्रतिमा प्यारी माता वामादेवी २ 
अश्वसेन के राजदुलारें जनम्या वाराणसी ॥१॥ 

मंगलाचरण

वंदन हो, वंदन हो,
मंगलमय महावीर! वंदन हो…
त्रिशला नंदन, भवभय भंजन, पाप निकंदन हो। वंदन हो। 
वंदन हो जग बंधन तोड्यां, भवोभव केरा फंदन फोड्यां

माँ तू है सब देवो से बढ़कर

देखे है मैंने लाख बिछौने नरमी के
एक से एक बढ़कर,
सुलभ न हुआ कोई बिस्तर मेरी माँ
की गोद से बढ़कर

यह पर्व पर्यूषण

यह पर्व पर्यूषण जैनों का, अलबेलों का मस्तानों का,
इस धर्म का यारों २ क्या कहना, यह धर्म है जैनो का गहना,
हो हो ऽऽऽऽ हो ऽऽऽऽ 
यहाँ होती अठाई घर घर में, नित होती पूजा मंदिर में