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तुझे सूरज कहूं या चंदा

जब तक सांसे चलती है, गुरुवर की महिमा गाऊँ।
सपने में गुरु को देखूँ, जागूं तो दर्शन पाऊँ।
जब माया मोह में उलझा, मन ने मुझको भटकाया। 
गुरूदेव ने हाथ पकड़कर, मुझे सत्य का पथ दिखाया। 

अगर तुम मिल

अगर गुरु मिल जाये, हृदय को खोल देंगे हम, 
पाप जितने किये गुरुवर के, सम्मुख बोले देंगे हम 
किसी का ना बुरा सोचूँ, प्रतिज्ञा आज करता हूँ, 
किसी का ना बुरा बोलूँ, ये चिन्तन आज धरता 

मेरी लागी गुरु संग प्रीत...

मेरा कस के पकड़ लो हाथ, छुड़ाऊं तो छुड़ाया नहीं जाये।। 
जब तक है जीवन मुझसे (दादा) गुरुवर न बदले। 
बदलने से पहले गुरुवर, मेरे प्राण निकले। 
मेरे सर पर रख दो हाथ, हटाऊँ तो हटाया नहीं जाए ||1|| 

लाल दुपट्टा उड़ रहा है

रोज तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं। 
यही सोचकर अपने दोनों नैन भिगोते हैं। 
कभी तो तस्वीर से निकलोगे, कभी तो मेरे दादा पिघलोगे।। 
अपनापन हो आँखों में, होंठो पे मुस्कान हो। 

बाबुल की दुआएं

गुरूराज तुम्हारे चरणों में, जीवन को थोड़ा प्यार मिले। 
मैं भूल सकूं दुनिया सारी, तेरा प्यार मुझे किरतार मिले। 
यह जीवन का उपवन मेरा, वीरान हुआ मुरझा करके। 
पीड़ा की धूप में जल जल के, दिल सुख गया कुम्हला करके।

चाँदी जैसा रंग
चाँदी जैसा रंग

गुरू भक्ति का रंग निराला, भक्ति रंग कमाल 
एक घड़ी रंग जाय, जो भी, तारे दीन दयाल ... टेर।।                 
जिस पर उनकी महर नजर हो, मन इच्छित फल पाय। 
इस दरबार में आने वाला, खाली हाथ न जाय। 

गुरुवरजी गुरुवरजी

गुरुवरजी गुरुवरजी आना जरूर
दर्शन देने आना जरूर
गुरुवरजी मेरे आना, दर्श दिखाना, 
हमें याद रखना, कहीं भूल न जाना, 

ये जग का पालन हारा है

ले गुरु का नाम, बंदे ये ही तो सहारा है, 
ये जग का पालन हारा है।। 
तारीफ क्या करूँ, इन दीन दाता की, दयालु नाम है-2
दीन दुःखियों के दामन को भर देना, गुरु का काम है। 

जय जय गुरुवर गाना

मिल के गाना, दिल से गाना, गुरुवर के गुण गाना। 
भक्ति धुन में, झूम-झूम के, भजनों में खो जाना।।
छोटा सा नाम है, लगता न दाम है। 
कुशल-कुशल बस, जपना सुबह शाम है। ओऽऽऽऽ 

मेरे दादा की कहानी, कहती महरौली जुबानी
मेरे दादा की कहानी, कहती महरौली जुबानी

मेरे दादा की कहानी, कहती महरौली जुबानी। 
सर पे ताज है मणि का, दूजे दादा की निशानी।। 
विक्रमपुर का नन्हा बालक, दत्त शरण में आया-2
दीक्षा ले अल्पायु में ही, आचारज पद पाया-2