जिन शासन के उजियारे हो, मणिधारी चन्द्र सूरीश्वर,
दर्शन दो आज दयाकर-2
जिनदत्त सूरि के पटधारी, जैनों में एक प्रभाकर,
दर्शन दो आज दयाकर-2।।
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कुशल नाम है कितना प्यारा, जन-जन की आँखों का तारा।
शासन का उजियारा, मैं लेता रहूंगा, ये नाम तुम्हारा।
मैं लेता रहूंगा, ये नाम तुम्हारा ||
जैन धर्म की शान वो, ज्योति पूंज महान-2
जनम जनम का दास हूँ... गुरुदेव तुम्हारा-2
जीवन नैया डोल रही है... दे दो इसे सहारा।।
अपने मन मन्दिर में, तेरी ज्योत जलाऊँ।
अपने मन दर्पण में, तेरा ध्यान लगाऊँ ।
गुरुदेवा हो...
गुरुदेवा-गुरुदेवा... आये हैं आये तेरे द्वार पे
गुरुदेवा- गुरुदेवा... तेरे सहारे मेरी नाव रे
गुरुदेवा हो गुरुदेवा हो-गुरुदेवा
गुरुवर तेरे चरणों की, जो धूल ही मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर संवर जाए ||
सुनते हैं दया तेरी, दिन रात बरसती है।
एक बूँद जो मिल जाए, कली दिल की खिल जाए।
कोई दीजो-3 रे संदेश, म्हारा गुरुवर ने संदेश,
हिवड़े कुशल सूरी बस जाए...
अंखियां छम-छम आंसू बरसे, म्हारा नैन मिलन ने तरसे
दर्शन दीजो रे...2 गुरुदेवऽऽऽ-2
अजमेर का एक सितारा, चमका था आकाशों में 2
जैन संघ का बना था नायक, देखा सारे भक्तों ने ॥ध्रुव।।
था वो मसीहा इस दुनिया का, कोई कैसे भुलायेगा,
हरपल हर घड़ी इस मूरत को, इन नैनों में बसायेगा,
नन्हा सा फूल हूँ मैं
चरणों की धूल हूँ मैं
आया हूँ मैं तो तेरे द्वार,
प्रभुजी मेरी पूजा करो स्वीकार
अंगुली पकड़ मेरी, चलना सिखाता है,
चलना सिखाता है, चलना सिखाता है...
कभी तो ये दादा, मांझी बन जाता है,
कभी तो ये दादा, साथी बन जाता है...
ऐ मेरे दादा गुरु, दुनियाँ के दाता गुरु,
तुम मेरे भगवान...
अपने गुरु का प्यार ले, भक्ति का उपहार ले,
कर गये कल्याण-2... तुम... ऐ... ||ध्रुव||