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मेरे दादा का ठिकाना है
मेरे दादा का ठिकाना है

दादा तुमसे मिलने का, सत्संग ही बहाना है-२ 
दुनियाँ वाले क्या जाने, मेरा रिश्ता पुराना है-२ 
कलियों में ढूंढा तुम्हें, फूलों में पाया है होऽऽऽ-२ 
तुलसी के पत्तों में, मेरे दादा का ठिकाना है-२ 

दरबार गुरु के चले आना
दरबार गुरु के चले आना

खुल जायेगा किस्मत का ताला, दरबार दादा के चले आना। 
हो जायेगा तकदीर वाला, दरबार गुरु के चले आना।। 
चमत्कार ऐसा, मिला न मिलेगा। 
सभी करना तन मन से, दादा की सेवा। 

मिले न तुम तो जी घबराये

तेरे दर्श को जी ललचाए, देखूं तो झूमे गाये 
हमें गुरु मिल गये……. 
देहली के राजा तेरी अर्थी उठी ना माणिक चौक से 
शाही फरमान से भी हिल ना सकी हाथी के जोर से 

जिया बेकरार है
जिया बेकरार है

कुशल कुशल दातार है, भक्तों का आधार है। 
कोई निराश न जावे ऐसा, दादा का दरबार है 
कुशलसूरि गुरुदेव आपकी, कीर्ति जग विख्यात है। 
इस कलियुग में अद्भुत ज्योति, प्रकट रही साक्षात् है। 

कुशल करना.. कुशल करना..

कुशल करना कुशल करना, कुशल गुरुराज शासन में। 
तुम्हीं हो शक्तिमय निज भक्त, विघ्नों के विनाशन में ||
महा अन्धेरे में सोते, निरख लो अपने भक्तों को। 
उठाकर आप अब जल्दी, लिवा लाओ प्रकासन में ||

वादा ना तोड़
वादा ना तोड़

मणिधारी बोल - २, तेरे कर्म करेंगे प्यारे 
कर्मों को तोड़ मणिधारी बोल …
करता क्यों तेरी मेरी, कुछ ना रहेगा
माया को छोड़ यही पे, जाना पड़ेगा - २ 

पंथी गीत
पंथी गीत

चलौ मन मोरा हो, चलौ मन मोरा 
दादा गुरु के शरणा हो, चलौ मन मोरा 
बंदौ गुरु के चरणा हो, चलौ मन मोरा
भरम तजि चरणा हो, चलौ मन मोरा 

 

स्वतंत्र चाल

मेरा आपकी दया से, हर काम हो रहा है। 
करते हो तुम गुरुवर, मेरा नाम हो रहा है। 
मेरी जिंदगी में तुम हो, मेरे पास क्या कमी है। 
मुझे और अब किसी की दरकार भी नहीं है। 

थोड़ासा प्यार हुआ है

आसरा एक तेरा, एक तेरा सहारा 
सुनले फरियाद मेरी, मैंने तुमको पुकारा। 
जख्म जग ने दिया है, घाव किसको दिखाऊं। 
कोई अपना नहीं है, हाल किसको सुनाऊं। 

रात गुरु सपनें में आये

रात गुरु सपने में आये 
अखियाँ खुल गयी खुल गयी अखियाँ 
जिभर पहले दरस किया मैंने 
चरणों का अमृत रस पिया मैंने