पंछी उड जायेगा होते ही भोर
पल में कट जायेंगी सांसों की ये डोर
अवसर के रहते ही चाहे कुछ भी सीख
तुझको जग जाना है निंदयों को झकझोर
Library
कदम कदम पर मोहे करम सताये
करम सताये हमें चैन न आय ...
इक तो प्रभुजी मोहे कर्म सतायें, लाख चोरासी भ्रमण कराये
भ्रमण कराये स्वामी बड़ा तड़फाये रे ...
मन को लगन अब यहाँ
जायेगा अब तू कहा
मन में बसाले, दिल में छुपाले
प्रभु की मूरत यहां
आ आ आ
रे प्राणी आ...... आ...... आ
महावीर जी के दर पे आके हो 2
महावीर जी के गुण गा........ गा.....
सुनो सुनो मेरे महावीर स्वामीजी तुम आओजी
आके दर्श दिखाओ दिखाओजी, आओजी
स्वामी मेरे महावीर स्वामी
तुम्हारे बीना खाली जिंदगी का पिंजरा
उठा जा ओ सोये मानव उठ जा
कौन है ठिकाना जीवन का
फल में यहां से चला जायेगा
हवा में क्यों उड़ जाय तिनका
तेरे दरश को जी ललचायें देखूं तो झुमे गाये
हमें गुरु मील गये है 2
दिल्ली के राजा तेरी अर्थी उठी ना मानक चौक से
शाही फरमान से भी हिल ना सकी हाथी के जोर से
यह चादर भई पुरानी, तू सोच समझ अभिमानी
टुकड़े-टुकड़े जोरि जुगत सो,
सींक अंग लपटानी।
कर डारी मैलो पापन सौ,
कैसे-कैसे अवसर में गुरु
राग- सहाना ताल 3
कैसे- कैसे अवसर में गुरु, राखी लाज हमारी।
मो को सबल भरोसो तेरो, चंद्र सूरि पट धारी ।
प्रभु से कोई कह दे, कि तेरे रहते-रहते
अंधेरा हो रहा, कि तुम हो वहां, तो मिलने को यहाँ
कि भक्त गा रहा-प्रभु से
फंसा हूं में कर्मों से,