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मन की लगन अब यहाँ

(तर्ज- मस्ती भरा है शमा (परवरीश ) 

मन को लगन अब यहाँ 
जायेगा अब तू कहा 

मन में बसाले, दिल में छुपाले 
प्रभु की मूरत यहां 
मन को लगन

भक्ति से ज्योत जलाए चल 
बुझ न जाये बचाये चल 

खो के न पायेंगा, फिर पछतायेगा, 
प्रभु के दर्शन यहां 
मन की लगन 

प्रभु की भक्ति बढ़ाये चल, 
जीवन सफल बनायें चल 

पंछी भी गायेगा, सब को सुनाएगा 
तेरी मेरी दास्तां 
मन की लगन

 

 

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