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स्वरों की गीत माला में प्रभू

स्वरों की गीत माला में प्रभू गुणगान गाया है 2 
चरणों में मस्तक को शरण जीनराज पाया है 
स्वरों के गीत माला में...... 
मिला है पुष्प से भगवान, शरण पापों को हरने का

रे मनवा

चन्दन के दो चौकिये, फूलन के दो हार 
केशार भारिया बाटको पुजों पारसनाथ।   रे मनवा। ......  
प्रभु दर्शन सुख सम्पदा, प्रभु दर्शन नवनीत 
दर्शन से पाशिए, सकल पदारथ सिद्ध।    रे मनवा ...... 

तेरा नाम है कितना प्यारा

तेरा नाम है कितना प्यार आ  
काम लगता है जिनवर सारा 
तेरे दर्श की लगन में हमें
आना पड़ेगा दरबार में दुबारा 

प्रार्थना

अरिहंतो को नमस्कार 
श्री सिद्धों को नमस्कार 
आचार्यों को नमस्कार 
उपाध्यायों को नमस्कार

 

गाओ मिलकर सारे

गाओ मिलकर सारे 2 
वीर प्रभु के चरण कमल में गुंजे गाण हमारे 
गाओ गाओ गुण गाओ रे.......  
भाव भक्ति से प्रेरित होकर, मनुआ गुण गुण गाये,

जनम जनम का दास हूं

जनम जनम का दास हूँ, प्रभू पार्श्व तुम्हारा 
जीवन नैय्या डोल रही है 2 दे दो हमे सहारा 
अपने मन मंदिर में तेरी ज्योत जलाऊँ हो 
अपने मन दर्पन में तेरा ध्यान लगाऊँ 2

 

भजन

मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊ 
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊ 
तु ने मुझको जग में भेजा, निर्मल देकर काया 
आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया 

जिनराया मेरे मन भाया

जिनराया मेरे मन भाया 
तुझ दिन कोई न दिल आया हो   
तू भव दुःख को हरता है 
मोक्ष का मालिक कर्ता है 

 

नही सुमिरन करे, नही ध्यान लगाये

नही सुमिरन करे, नही ध्यान लगायें 
प्रभू कैसे पार लगाये 
रे भज मन विर प्रभू के, सुमिरन विर प्रभू के 2 
शुद्ध मन से कभी न नीज को ध्यासा 

जब मन विर गाये

जब मन विर गाये मन का अंधेरा जाये 
ज्ञान का प्रकाश पाये, जागो हे मेरे मन महावीर स्वामी 
जागो रे जागो रे जागो दुनिया जागो 2. 
मगर नगर सब सथ मलियाँ जागी