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Library > चालीसा
श्री सुमतिनाथ चालीसा

श्री सुमतिनाथ का करूणा निर्झर, भव्य जनो तक पहूँचे झर – झर ।।
नयनो में प्रभु की छवी भऱ कर, नित चालीसा पढे सब घर – घर ।।
जय श्री सुमतिनाथ भगवान, सब को दो सदबुद्धि – दान ।।
अयोध्या नगरी कल्याणी, मेघरथ राजा मंगला रानी ।।

श्री अजितनाथ चालीसा

श्री आदिनाथ को शिश नवा कर, माता सरस्वती को ध्याय ।
शुरू करूँ श्री अजितनाथ का, चालीसास्व – सुखदाय ।।
जय श्री अजितनाथ जिनराज । पावन चिह्न धरे गजराज ।।
नगर अयोध्या करते राज । जितराज नामक महाराज ।।

श्री धर्मनाथ चालीसा

उत्तम क्षमा अदि दस धर्म,प्रगटे मूर्तिमान श्रीधर्म ।
जग से हरण करे सन अधर्म, शाश्वत सुख दे प्रभु धर्म ।।
नगर रतनपुर के शासक थे, भूपति भानु प्रजा पालक थे।
महादेवी सुव्रता अभिन्न, पुत्रा आभाव से रहती खिन्न ।।

श्री आदिनाथ चालीसा

शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन को, करुं प्रणाम |
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ||
सर्व साधु और सरस्वती जिन मन्दिर सुखकार |
आदिनाथ भगवान को मन मन्दिर में धार ||

श्री नमोकार चालीसा

सब सिद्धों को नमन कर, सरस्वती को ध्याय।
चालीसा नवकार का ,लिखूं त्रियोग लगाय।
महामंत्र नवकार हमारा।
जन जन को प्राणों से प्यारा।

श्री शांतिनाथ चालीसा

शान्तिनाथ भगवान का, चालीसा सुखकार ।।
मोक्ष प्राप्ति के लिय, कहूँ सुनो चितधार ।।
चालीसा चालीस दिन तक, कह चालीस बार ।।
बढ़े जगत सम्पन, सुमत अनुपम शुद्ध विचार ।।

दादा गुरुदेव इकतीसा

श्री गुरुदेव दयाल को, मन में ध्यान लगाए,
अष्टसिद्धि नवनिधि मिले, मनवांछित फल पाए ||
श्री गुरु चरण शरण में आयो, देख दरश मन अति सुख पायो,
दत्त नाम दुःख भंजन हारा, बिजली पात्र तले धरनारा ||

श्री बाहुबली चालीसा

श्री बाहुबली चालीसा नमूं सदा नवदेवता, मन मंदिर में धार।
बाहुबली भगवान को, करके नमन हजार।।
पूजूं मन वच काय से, करता जय जयकार।
बाहुबली भगवान का, चालीसा सुखकार।।

श्री नाकोड़ा भैरव चालीसा

पार्श्वनाथ भगवान की, मूरत चित बसाए ॥
भैरव चालीसा लिखू, गाता मन हरसाए ॥
नाकोडा भैरव सुखकारी, गुण गाये ये दुनिया सारी ॥
भैरव की महिमा अति भारी, भैरव नाम जपे नर  नारी ॥

श्री पार्श्वनाथ चालीसा

शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूँ प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम।।
सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकार।
अहिच्छत्र और पार्श्व को, मन मंदिर में धार।।