यंदूँ श्रीअरिहंत पद, सिद्ध नाम सुखकार।
सूरी पाठक साधुगण, हैं जग के आधार ।।१।।
इन पाँचों परमेष्ठि से, सहित मूल यह मंत्र।
अपराजित व अनादि है, णमोकार शुभ मंत्र ।।२।।
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13 October, 2026
13 October, 2026
शीतल हैं शीतल वचन, चन्दन से अधिकाय।
कल्पवृक्ष सम प्रभु चरण, है सबको सुखदाय।।
जय श्री शीतलनाथ गुणाकर, महिमा मण्डित. करुणासागर।
भद्धिलपुर के दृढ़रथ राय, भूप प्रजावत्सल कहलाए।।
13 October, 2026
शान्तिनाथशान्तिनाथ भगवान का, चालीसा सुखकार।।
मोक्ष प्राप्ति के लिय, कहूँ सुनो चितथार ।।
चालीसा चालीस दिन तक, कह चालीस बार।।
बढ़े जगत सम्पन, सुमत अनुपम शुद्ध विचार ।।
13 October, 2026
अरिहंत सिद्ध आचार्य को करूँ प्रणाम ।
उपाध्याय सर्व-साधू करते स्व-पर-कल्याण।।
जिनधर्म जिनागम जिनमंदिर पवित्र-धाम।
वीतराग की प्रतिमा को कोटि-कोटि प्रणाम ।।
13 October, 2026
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करू प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम।
सर्व साधु और सरस्वती, जिन मन्दिर सुखकार।
आदिनाथ भगवान को, मन मन्दिर में धार।।
13 October, 2026
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करू प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम।
सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकार।
अहिच्छत्र और पार्श् को, मन मंदिर में धार।।
13 October, 2026
शीश नवा अरिहन्त को, सिद्धन करूँ प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम।
सर्व साथु और सरस्वती, जिन मन्दिर सुखकार।
महावीर भगवान को, मन-मन्दिर में धार।
27 June, 2025
लोक शिखर के वासी है प्रभु, तीर्थंकर सुपार्श्व जिनराज ।।
नयन द्वार को खोल खडे हैं, आओ विराजो हे जगनाथ ।।
सुन्दर नगर वारानसी स्थित, राज्य करे राजा सुप्रतिष्ठित ।।
पृथ्वीसेना उनकी रानी, देखे स्वप्न सोलह अभिरामी ।।
27 June, 2025
ऋषभ – अजित – सम्भव अभिनन्दन, दया करे सब पर दुखभंजन
जनम – मरन के टुटे बन्धन, मन मन्दिर तिष्ठें अभिनन्दन ।।
अयोध्या नगरी अती सुंदर, करते राज्य भूपति संवर ।
सिद्धार्था उनकी महारानी, सूंदरता में थी लासानी ।।
27 June, 2025
श्री जिनदेव को करके वंदन, जिनवानी को मन में ध्याय ।
काम असम्भव कर दे सम्भव, समदर्शी सम्भव जिनराय ।।
जगतपूज्य श्री सम्भव स्वामी । तीसरे तीर्थकंर है नामी ।।
धर्म तीर्थ प्रगटाने वाले । भव दुख दुर भगाने वाले ।।


