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Library > पार्श्व भक्ति
श्री पार्श्वनाथ जिन पूजा (कवि श्री बख्तावरसिंह)

या भव-कानन में चतुरानन, पाप-पनानन घेरि हमेरी।
आतम-जानन मानन ठानन, बान न होन द इ सठ मेरी।।
तामद भानन आपहि हो, यह छान न आन न आनन टेरी।
आन गही शरनागत को, अब श्रीपतजी पत राखहु मेरी।।

वाहला अंतरिक्ष दादा बोलो बे घड़ी

छूटे भले प्राणों पण दादा आ छूटे नहीं, हले भले दुनिया सारी,
मनने बंधाणी ने तन्ने गुंठाणी, दादा केरी प्रीती,
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...
वाहला अंतरिक्ष दादा, बोलो बे घड़ी ...

पारस रे तेरी कठिन डगरिया

पारस रे तेरी कठिन डगरिया
किस विधि मैं तोहे पाऊँ रे साँवरिया
कठिन तेरा जिन रूप में आना
कठिन तेरे शुभ दर्शन पाना

लावो अंतरमां अंतरिक्षजी

सोंपी तारा चरणमां, सर्वस्व मारं, हवे आरामी क्षणो,
रहुं तारा शरणमां, बाव्ठ बनी हुं, खरी आनंदी क्षणो ...

संखेश्वर तू सहरो

ऋषभजी बोलावे छे, एना सपना आवे छे
जे एना थई जावे छे, एना ए थई जावे छे.
ऋषभजी बोलावे छे ...

जय जय श्री पारसनाथ

जय जय श्री पारसनाथ
परसनाथ पारसनाथ
जय जय श्री पारसनाथ (२)
तेरे ही हवाले,

अंतरना अंतरिक्षमा मने मलजे

अंतरना अंतरिक्षमां मने मळजे,
भीतरना दरियामां थी मने मळजे,
आंखोमां पूर छे, हैयुं मजबूर छे,
भक्तिनो ए ज सूर छे ... (2)

रोम रोम में समाया पारसनाथ

मेरे मन में पारसनाथ, तेरे मन में पारसनाथ,
रोम रोम में समाया पारसनाथ रोम रोम में समाया
पारसनाथ रे, मेरी साँसों में समाया पारसनाथ रे,
मेरे मन मे पारसनाथ ।।

हे शंखेश्वर स्वामी

हे शंखेश्वर स्वामी, प्रभु जग अंतरयामि।
तमने वंदन करीये, शिवसुखना स्वामी ॥हे शंखेश्वर ... ।
मारो निश्चय एक छे स्वामी, बनू तमारो दास-2।
तारा नामे चाले-2, मारो श्वासोश्वास ॥हे शंखेश्वर ... II1॥

केवा प्यारा लागे मारा पार्श्वनाथ दादा

केवा प्यारा लागे मारा पार्श्वनाथ दादा
लागे जाणे राजा जेवा पार्श्वनाथ दादा
हो दादा मारा दादा हो दादा मारा दादा
हो जाणे राजा जेवा हो मारा दादा (२ बार)