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Library > पार्श्व भक्ति
जपलो पारस ने हो...

थारों जनन मरण मिट जासी 
थाने श्रसु पार लागासी 
जीवड़ी आतम पद पा जास 
जपलो पारस ने हो ..  

है पार्श्व तुम्हारे द्वारे पर एक दर्श भिकारी आया है

है पार्श्व तुम्हारे द्वारे पर एक दर्श भिकारी आया है। 
प्रभु दरशन भिक्षा पाने को दो नयन कटोरे लाया है | 
नहीं दुनियाँ में कोई मेरा है आफत ने मुझको घेरा है। 
एक सहारा तेरा है, जग ने मुझ को ठुकराया | 

करले - करले रे दर्शनिया

करले - करले रे दर्शनिया पाश्र्वं प्रभु की
तोरे कमों की बंधनिया, टूटे रे बावरीया  २
पार्श्वनाथ की प्रतिमा प्यारी माता वामादेवी २ 
अश्वसेन के राजदुलारें जनम्या वाराणसी ॥१॥ 

पार्श्व जिणंदा

पार्श्व जिणंदा वामाजी केनंदा, तुम पर वारी जाऊंबोल बोल रे, 
हां रे दरवाजे तेरे खोल खोल रे, पार्श्व जिणंदा...
दूर दूर देश से, लंबी सफर से
हम दर्शन आए तोल तोल रे

श्री पार्श्वनाथ चालीसा

शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूँ प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम।।
सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकार।
अहिच्छत्र और पार्श्व को, मन मंदिर में धार।।

निहारूँगी  स्वामी पारसनाथ को
निहारूँगी स्वामी पारसनाथ को
निहारूँगी स्वामी पारसनाथ को
अंतरिक्ष के पास प्रभुजी अब दरवाज़े खोलो तूम
अंतरिक्ष के पास प्रभुजी अब दरवाज़े खोलो तूम
छोटा सा है एक झरोखा दर्शन उससे होते है
हे पतित पावन विश्व वात्सल पार्श्व शंखेश्वर प्रभु
हे पतित पावन विश्व वात्सल पार्श्व शंखेश्वर प्रभु

He Patit Pavan Vishv Vaatsalya Parshv Shankheshwar Prabhu

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108 प्रभु पार्श्वजी
108 प्रभु पार्श्वजी

108 Prabhu Parshvaji

...
श्री पारसनाथ स्त्रोत्र

नरेन्द्रं फणीन्द्रं सुरेन्द्रं अधीशं,
शतेन्द्रं सु पूजैं भजै नाय शीशं ॥
मुनीन्द्रं गणेन्द्रं नमो जोडि हाथं,
नमो देव देवं सदापार्श्वनाथ। ॥1॥