कल्हारा पारस मोह भंजी, कालहारा बनी जाजो,
निरंजनोना नगरमां, एकवार मुजने लड़ जाजो,
जैनाबादने भृगुकच्छ तारा तीर्य जगमां जाणीता,
श्री "कल्हारा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [0]

गंधारनगरे बिराजता हे गंधहस्ति समा विभु.
अमृत जरे तुज नयणथी, ने वयणथी पारसप्रभु,
तुज दर्शनथी सहु भविकना, संताप ताप समी जता,
श्री "अमीजरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [e]

प्रगट प्रभावी नाम तारुं, नाथ साचुं होय जो,
कलिकालमां मुजने प्रभुजी, मुक्ति सुख देखाडजो,
तुज नाम सत्य ठरे ज छे, मुज आतम आनंदता,
श्री "प्रगटप्रभावी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [९]

काचा सुतरना तांतणे जे कूपमांथी प्रगटता,
वेणुतणा प्रभुजी छतां लोढासमा जे बनी जतां,
पद्मासनार्थे शोभता दर्भावतीमां राजता,
श्री "लोढण" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१.]

है विमल पारस विमल करों, मुज कर्म मल उच्छेदीने,
मुज ह्यदय कमले वास करजो, अवगुणो सहु भेदीने,
तुज नयण कमले पेखीने मुज मन भमर ललचाय छे,
श्री "विमल" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [e१]

अतीत चोवीसी तणा नेमि प्रभु उपदेशथी,
आषाठी श्रावक पूजता नीलम तणा प्रभु पार्श्वजी,
नागार्जुन ने आठमां बलदेवजी पण पूजता,
श्री "स्थंभन" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१२]

जे स्वप्नसूचित जमीनमांथी, देव पूजित प्रगटता,
जेना दर्शनथी सहु भक्तजनना, धर्म नवनवा सिद्धता,
चोवीश जिनवर सहित जे, नवसारी नगरे राजता,
श्री "नवसारी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [t]


सुरत गामे शोभता, मुज हयदयमां बिराजता,
अति प्राचीन प्रभुने जोवता, मुज कार्य सघला सीजतां,
सम्यक्त्य बीज रोपतां, मोहरिपुने जे जीततां,
श्री "उमरवाडी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [२]


षट्मास सुधी तुज दर्श स्वामी, को क पुण्याधिक करे,
हे नाथ तुजने ध्यावता सहु, काज भक्तोना सरे,
कैशरीया अमीवृष्टि वरसे, मानु दयारसना जरा,
श्री "सहस्त्रफणा" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [3]


प्रदुःख भंजनकार देवा, सौ चाहे सुचित पार्श्व सेवा,
सुरतमां छो आप एवा, आपो छो तत्काल मेवा,
हैयानी आशा पूरी करवा, अक्तो आवे जाप करवा,
श्री "दुःखभंजन" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [४]


नमिउण मंत्रना सिद्धिदाता सूरजमंडण छो तमे,
है सुरतनगरे रिद्धिदाता, दुःख विहंडण छो तमे,
सुरनर मुनिवर भक्तिथी ज्यां वामानंदनने नमे,
श्री "सूरजमंडण" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [4]


जे प्रभुना दर्शथी सहु आपदा दूरे थती,
ने जे प्रभुना स्पर्शथी सहु संपदाओ मली जती,
विघ्नो करी शिवमार्गना, जे मुक्ति सुखने आपता,
श्री "विघ्नहरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [E]   

 

कंसारी नगरना कंथ हे, भगवंत मुज मन आवजो,
मुज कर्म कंस हणी प्रभु, कंसारी बिरुद निभावजो,
स्तंभन तीर्थ बिराजीने, थंभावता भवि चितडा,
श्री "कंसारी" प्रभु पार्श्वने भावे करु हुं वंदना ... [१३]


मूरति अलौकिक नीरखी तारी, नयन युगल मुज ठरे,
राज्य लेवा शिवनगरनुं, हुं आव्यो तारी कने,
मा-बाप मान्या में तने, मुज टाल भावना तापने,
श्री "रत्नचिंतामणी" प्रभु पार्श्वने भावे करे हुं वंदना ... [१४]


भौतिक सुखने अर्पतुं ते दिव्य चिंतामणी कहुं.
पण मुक्ति सपखने आपतां ते सोम चिंतामणी कहुं
संघवीनी पोले बिराजतां पद्मावती आराधता,
श्री "सोमचिंतामणी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१५]


गुण रत्न रोहण भुवन-मोहन, भुवन पारसनाथजी,
तुज मुरति ना मलकारथी मोही रहया सुरनाथजी,
मने मुक्ति पगथारे चढावो, नाथ पकडी हाथजी,
श्री "भुवन" प्रभु पार्श्वने भावे करं हुं वंदना ... [१6]


दुर्गुणोनी भौड वच्चे हुं भींसायो भव महीं,
है भीडमंजन। भांगजो, भीड भक्त छुं तारो सही,
वटवृक्ष नीचेथी प्रगटता, खेडा तीर्थे राजता,
श्री "भीउभंजन" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१b]


जे राजनगरे राज करतां, राज देतां मुक्तिनुं,
श्री शामला प्रभु पार्श्वजी, फल मांगु तारी भक्तिनुं,
मुज आतमनी शामली, सहु कर्म रज दुर काढता,
श्री "शामला प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [t८]  


जे सर्व रिद्धि सिद्धि ना, ने उन्नतिना मुल छे,
जे राजनगरनी संपदा ने, शांति सुखना मूल छे,
जेना प्रभाविक दर्शने सहु भविको नित आवता,
श्री "मुलेवा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१९]


पद्मावती माता तणुं हींकार बीज गणाय छे,
जेमां बीराज्या पार्श्व प्रभु, हींकार नाम गवाय छे,
जेना नाम मंत्रथी सर्व कार्यों, सिद्धता क्षणवारमां,
श्री "हींकार प्रभु पार्श्वने भावे करं हुं वंदना ... [२०]


तुम सुखनी उपमा जडे ना, इन्द्रना आवाशमां,
तुम सुख एक प्रदेशनुं नवि माये लोकाकाशमां,
सुखीया करो आ दासने, विनवी रह्या तुज आशमां,
श्री "सुखसागरा' प्रभु पार्श्वने भावे करु हुं वंदना ... [२१]


पद्मावती बहुमानथी हरदम हयदयमां ध्यावती,
संकट हरे तुज भक्तना भक्ति करे एक ध्यानथी,
जे नरोडा नगरी निवासी लोको श्रद्धा पामता,
श्री "पद्मावती" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [२२]


जे जगतना जगदीश जगचिंतामणीमां ताहरी,
स्तवना करी गौतम प्रभुए अरज सुणजो माहरी,
दुःखदुरितनुं खंडन करीने मोक्ष देजो मोह हरी,
श्री "मुहरी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [२३]


जे ध्वज तणा संकेतथी यात्रीना वावड आपता,
ते प्रगटता खेतर खेडंता तेजपुंजथी ओपता,
सहु दुर्गुणोने शोषी लड़ने सदगुणोने पोषता,
श्री "पोशीना" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [२४]


रूप तार्रं एरवुं अदभुत पलक विण जोया करुं,
नेत्र तारा निरखी निरखी, पाप मुज धोया करूं,
ह्यदयमां शुभ भाव राखी गुणरत्नो भर्या करुं,
श्री "नारंगा" प्रभु पार्श्वने भावे करें हुं वंदना ... [४3]


है टांकला प्रभु पासजा मुज जीवनना शिल्पी बनी,
पाषाण हुं लइ टंकणुं ने घाट आतमनो घडो,
जलपूर्ण टांकीथी प्रगटीया तेहथी तुज टांकला,
श्री "टांकला' प्रभु पार्श्वने भावे करे हुं वंदना ... [४४]


जेम पुष्पमां चंपातणा फुल श्रेष्ठ नाथ गणाय छे,
तेम सृष्टिमां सहु देवमां तुं देवाधिदेव मनाय छे,
तुं दिव्य छे, तुं भव्य थे, श्रध्येयने तुं ध्येय छे,
श्री "चंपा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [४५]


जे रजतनी मुद्रा दइने दुःख दोहग दारता,
गांभू नगरमां बेसणुं लइ मोहमल्ल विदारता,
गांभीर्य मुक पर ओपतुं पण आपतां जे प्रसन्नता,
श्री "गंभीरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [VE]


प्रजापालनृपनो भय हटाववा जे प्रभु निर्मित थता,
दैवी प्रभावे वेलुमांथी वज्रमय जे बनी जता,
माता अंबिका चरणमां रही जे प्रभुने सेवता,
श्री "भटेवा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [४७]


जे स्नात्रजलथी भविकना सहु दुःख दर्दों कापता,
दिव्य प्रभाव प्रकाशथी सहु यात्रीने हरखावता,
अदभुत बिंबना दर्शने सहु भव्यना मन मोहता,
श्री "मनमोहन प्रभु पार्श्वने भावे करं हुं वंदना ... [ve]


मलेच्छो तणी लडाइमां नवखंड थाता ताहरा,
पण अखंड सुख स्वामी प्रभु अखंड बनता माहरा,
खोवायेलाने खोलनारा आतमा मुज खोलजे,
श्री "नवखंडा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [५५]


जेना न्हवणथी अजय नृपना, रोग शोक सहु हारता,
हे भयहरा शिवसुखकरा सहु, नाम अजाहरा पाडता,
ने पूजता धरणेन्द्र आदि देवगण जेने वली,
श्री "अजाहरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [५६]


दे दोकडा देनार दोकडीया श्री पारसनाथजी,
मुज दुःखडा हरनार दोकडीया बनोने नाथजी,
प्रभासपाटण नवगभारे बेसणा भवतारणा,
श्री "दोकडीया" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [५७]


जे हास्य मोह निवारता पण हास्य मुख पर धारता,
जे चोरवडे बेसता पण मोह चोर निवारता,
हे चोरवाडी हसमुखा तुज आण सहु अवधारता,
श्री "चोरवाडी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [५]


नवपल्लवित निज अंगुली करनारा प्रभु ! नयने धरो,
मुज भावना मुर्च्छित बनी नवपल्लवित तेने करो,
मांगरोल नगरे इश जगदीश हे तुं जग जामीतो,
श्री "नवपल्लवित" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [५९]


आलम आखी नाथ तुजने देव साचो मानती,
छो शामला पण नाथ तारी धवल कीर्ति जामती,
जे बरेजे बलवंत बेणे, मोहबलने तोडवा,
श्री "बरेजा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६०]


 अमृत जरे मुखयी मुज आतमा भीजावजे,
ने अमरपद आपी प्रभु तुं देवाधिदेव कहावजे,
जे स्वप्न आपी भविकना श्रद्धा कमल विकसावता,
श्री "अमृतजरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६P]


हे सप्तफणा प्रभु पार्श्वजी मुज सात भय निवारजो,
भणसालथी मुज मोहने हे नाथ पाठ भणावजो,
तुज दर्शनी इच्छा धरे ते देव बनी पण आवता,
श्री "सप्तफणा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६२]


सुगठित तमारी देहयष्टि कर्मकष्टि कापता,
तुज भामणा लेती समष्ठि पार्श्व भाभा ओपता,
जे जामनगर जागता जीवमैत्रीने रेलावता,
श्रीं "भाभा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६३]


तारी प्रतिष्ठा नाथ करता कपिल केवली आवीने,
ने नागराजने देवगण आवी नमे जगनामिने,
छो कच्छना शणगारने अणगारना नायक तमे,
श्री "भद्रेश्वरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६४]


धूतपूरित भाजनने विषे भगवान जे कल्लोलता,
ने लाज राखी संघनी, दुष्कालने डोलावता,
जे कच्छ सुथरीमां बिराजे लाडला ललचामणा,
श्री "धृतकल्लोल" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६५]


परचो बताव्यो नाथ गजनीखान मान उतारवा,
भीनमालनो भगवान छे, श्री संघना भय भांजवा,
मुज मोह भयने भांगजे भगवान तुजने ध्याववा,
श्री "भयभंजन" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [६६]

प्रशमजरतुं मुखलडुं अमीरस जरंती आंखजी,
मेवानगरना राजीया पूरी करे सहु आंखडी,
भैरव नाकोटा करे सानिध्य जेनुं लणी लणी,
श्री "नाकोडा" प्रभु पार्श्वने भावे करें हुं वंदना ... [६४]

आ देशनी सीमे बिराजे, देश आखी रक्षवा,
तुज मस्तके अदभूत फणाने, नामतारूं लोद्रवा,
ज्यां आवता अहनिश अहिपति, भक्तिथी प्रभु भेटवा,
श्री "लोद्रवा' प्रभु पार्श्वने भावे करें हुं वंदना ... [6e]

संकटहरी सहु भक्तना जे वांछितोने आपतो,
जे हयदयमां स्थापे तने, तेने मुक्तिपदमां स्थापतो,
मुज मोह चोरने जेर करतो नयी जेसलमेरनो,
श्री "संकटहरण" प्रभु पार्श्यने भावे करुं हुं वंदना ... [६९]

मुज मनमंदिरमां जे प्रभुजी कुंकुम पगले पधारता,
मुज हृदयसरमां जे प्रभुजी मराल बनीने राजता,
मपज आतमाना हर प्रदेशे जे प्रभुजी बिराजता,
श्री "कुंकुमरोल" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [छ0]

आशारहित अवधुत समो तूं, ते छता आशा पूरे,
उपसर्गने सहनार तुं पण ते छतां संकट चूरे,
के नून नगरे जगत जननी, तुजमां नहि न्यूनता,
श्री "आशापूरण" प्रभु पार्श्वने भावे करें हुं वंदना ... [ut]

जे जीर्ण करतां क्षणमहीं मोहादि भावो भव्यना,
सहु सूरिवरो जश ध्यानथी, इच्छित कार्यो साधता,
ने प्रतिष्ठादिक कार्य जेना, नाम मंत्रथी सिद्धता,
श्री "जीरावला" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [ल२] 

जगमोह विष उतारवा सिरोडीमां तुं गारुडी,
तुज मूर्ति मोहनगरी जाणे खीली अमृतवेलडी,
प्रभु तुंही तुंही धून जागे एक ए मुज कामना,
श्री "शीरोडीया" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [७३]

बलतो उगार्यो नागने, ते मां शुं मार्यो मीर ते,
मुज मोहपीरने मारशो तो, मानु तारा हीरने,
मोरपुर निवासी है प्रभु, तुं वीरने वडधीर छे,
श्री "हमीरपुरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [७४]

पोसलीया तीर्थाधिपतीने पेखता नयना ठरे,
तुज श्यामली मूरत प्रभु मुज कर्मरज श्यामल हरे,
मुज वासना शोषी लड़ने भावनाने पोषता,
श्री "पोसलीया" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [७५]

ज्यां कच्छना रावे वसाव्युं धाम काछोली तणुं,
त्यां थापीया प्रभु पार्श्वने तुज नाम काछोली तणुं,
काछोली पारस कर्म छोली छेडलो भवनो करो,
श्री "काछ्रेली" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [bE]

बेडा बिराजी थड़ सुकानी बेडो पार लगावता,
दिव्य प्रभाव थकी सुगंधी हस्तमां फेलावतां,
अमृत कचोला नयनमां दादाजी जाणे लागता,
श्री "दादा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [8b]

मीठडी नदीनां तीर पर बेठा प्रभुजी मीठडा,
ने नाम तारं सेसली करे नामशेष दूरितडां,
मुज शेष कर्मोने हणो, तो मानुं तारी विशेषता,
श्री "सेसली" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [be] 

  राणकपुरनुं धाम धरणाशाह ज्यां विकसावता,
प्रभु पार्श्वनुं मंदिर तिहां सहु स्थपतिओ मली स्थापता,
छे तीर्थ प्रभु आदि तणुं, ज्यां पार्श्व प्रभु पण जागता,
श्री "राणकपुरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [७९]

चोपाट चार गति तणी खेलु प्रभु संसारमां,
मुज सोगठी जिताडजो पहोंचाडजो तुज द्वारमां,
जेखलगिरिना मूलमां जे जमीनमांथी प्रगटता,
श्री "सोगढीया" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८०]

वरकाणा नगरे शोभता वरगंधहस्ति समा प्रभु,
विनवी रहया आ भक्त तारा, कां नवि रिजता विभु ...?? ,
जगमाताने जगतात तुं जगनाथ ए तुज नामना,
श्री "वरकाणा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८१]

पाली नगरमां पालनारा, बालने आ पालजो,
पालनहारा बिरुद तारुं, तोज साचुं जाणजो,
नवअंगमां नवयंत्र लेखो, तेहथी तुं नवलखा,
श्री "नवलखा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८२]

बावलीयाना वृक्ष नीचेथी स्वयंभू प्रगटता,
कापरडा तीर्थे बिराजी कर्म कंटक कापता,
जेना दर्शथी प्रगटे स्वयंभू बोधि बीजनी स्पर्शना,
श्री "स्वयंभू' प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८३]

अम्लाना पुष्प संकेतथी जे पार्श्व प्रभुजी प्रगटता,
पारसश्रेष्ठीनो साथियो जे स्वर्णमय बनावता,
तेथी तमे फलवृद्धि छो मुज भक्ति फल वधारजो,
श्री "फलवृद्धि" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हूं वंदना ... [८४]  

 श्री विजय चिंतामणी तमे सर्वत्र विजय अपावता,
मेडता नगर निवासी मुज जडता सदा उच्छेदता,
चिंता चूरो चिंतामणी चहु चेतना चेतावजो,
श्री "विजयचिंतामणी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८५]

जे स्वप्न आपी केरडानां वृक्ष तलथी प्रगटता,
जे जव भरेल करंडियो सोनी महीं पलटावता,
मुंडावा नगरे तीर्थ तारां मुंडजो मुज मोहने,
श्री "मंडोवरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८६]

हे नाथ जीर्णोद्धार जांजणमंत्री तारो करावता,
तारी स्तुतिथी देवकृत उपसर्ग सहु दूरे थता,
छे नाम तारुं एहवुं जाणे कर्मने पडे कोरडा,
श्री "करेडा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८७]

सिंहाकृति तुज मुजनी ने व्याध्रशिल्पे बिराजता,
अदभूत परचा पूरीने आशातना सहु टालता,
तारक मेरा वोही-वोही भक्त जन पूकारता,
श्री "वही" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८८]

अमीरसतणी धार वहेती हे प्रभु तुज नयनमां,
समता तणी सरवाणी वहेती है प्रभु तुज वयणमां,
शमी जती अमीना महीं तुज दर्शथी दुर्भावना,
श्री "समीनां" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [८९]

तुज मुख रुपी चंद्रथी अमृत जरतुं देखीने,
आकाशमां आ चंद्र भमतो आपनुं तेज पेखीने,
मुज हयदयनो उकलाट ठारो चांदनी फेलावता,
श्री "चंदा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [९०]

नागेश्वरा परमेश्वरा तुं परमज्योत स्वरुप छे,
प्रभाव ताहरो छे अनोखो विषापहारी रुप छे,
मरकत मणिमय देहने काउसग्ग मुद्रा धारता,
श्री "नागेश्वरा" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [९१]

तुज चरणकजमां रावने उमराव अक्तिथी नमे,
तुज राव छे, भवथी उगारो मोहराय मुजने दमे,
ज्यां रावणे भक्ति कीधी प्रभु तेहथी तुमे रावणा,
श्री "रावण" प्रभु पार्श्वने भावे करे हुं वंदना ... [९२]

इच्छया दिना मांग्या दिना तुज भक्ति मुक्ति आपती,
तुं कल्पद्रुमथी अधिक छे कल्पद्रुम प्रभु पासजी,
मथुरा महीं मधुरा प्रभु मुज मोहने मथी नांखजे,
श्री "कल्पद्रुम" प्रभु पार्श्वने भावे करें हुं वंदना ... [९३]

कुर्कट अने इश्वरतणा, बे चरम भवनी यादमां,
आ नामथी दत्ते भराव्या, अरज सुणो फरियादमां,
मुज भवभ्रमण किम नहीं मिटाव्युं तारजो परमात्मा,
श्री "कुकडेश्वर" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [९४]

कामित पूरो सहु लोकना कामितपूरण प्रभु पासजी,
े कामना मुज कामने दूरे करो हे नाथजी,
छे काम तारं भक्तजननी पूरी करवी कामना,
श्री "कामितपूरण" प्रभु पार्श्वने भावे करें हुं वंदना ... [९५]

जे अवंति सुकुमालनी शुभयादमां निर्मित थता,
कल्याणमंदिर स्तवन थकी फरीवार जे प्रभु प्रगटता,
ज्यां माणिभद्रवीर पण प्रभु पार्श्व पासे जागता,
श्री "अवंती' प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [९६]

 प्रभावथी पूरा प्रभु हासामपुरामां तमे,
छे अलौकिक मूर्ति तमारी तुं प्रभु मुजने गमे,
तुज हस्तमां नागनागणी जाणे धरणे पद्मावती रमे,
श्री "अलौकिक' प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [९b]

छत्र स्वरप तुज फेणमांथी, धार वहेती दुग्धनी,
परचो बताव्यो गीजनीने, अरजी सुणो आ मुग्धनी,
हे मक्षी पारस मोक्ष देजो, रक्षी-रक्षी मोहयी,
श्री "मक्षी" प्रभु पार्श्वने भावे करे हुं वंदना ... [९८]

कैशी स्वामीना उपदेशथी, प्रदेशी प्रतिमा भरावता,
दूध धार ने धरणेन्द्र साथे, जे प्रभुजी प्रगटता,
उपसर्ग ने सहनार तुं उपसर्ग तुं सहुना हरे,
श्री "उवसग्गहरं" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [९९]

वाराणसीए वारवा त्रण जगतना भव दुःखने,
प्रणत कम्पथी आवता प्रभु पासजी वामा घरे,
वाराणसीए जन्म दीक्षा नाण पण प्रभु पामता,
श्री "वाराणसी प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१००]

सम्मेतरीले साधु तेत्रीश साथ प्रभु आवे सही,
श्रावण सुदी आठम दिने नक्षत्र विशाखा महीं,
एक मासनुं अणसण करी ज्यां पार्श्व प्रभुजी सिद्धता,
श्री "सम्मेतशिखर" प्रभु पार्श्वने भावे करूं हुं वंदना ... [१o१]

खरदूषणे तुजने भराव्या, निरखता नयना हसे,
शिरपुर तणो शिरताज तुं अंतरीक्षमां अद्धर वसे,
तुं अंधने करे देखतो देखाड मुक्ति बारणा,
श्री "अंतरिक्ष" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१०२]

जे स्वप्न आपी प्रगटता ने संकटो सहु छेदता,
वीतरागता मुख पर दिसे पण, ते छतां मन मोहता,
भद्रावतीमां शोभता ने, भद्रता वरसावता,
श्री "केशरीया" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१०३]

केशरतणी वृष्टि थती ने अमीतणां जरणां जरे,
कुंभोजगिरिए बेसणा, तुं नाम जगवल्लभ धरे,
वल्लभ गणे मुजने प्रभु तो आतमा मारो ठरे,
श्री "जगवल्लभ" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१०४]

गिरुआ गुणो गणायना गिरुआ श्री पारसनाथना,
गिरुआ बनावे भक्त बंधन करी मोहपासना,
गिरुआ जिनालयमां बिराजे अमलनेर मुकाममां,
श्री "गिरुआ" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१०५]

जेम कामधेनु कामघटने सुरतरु इच्छा पूरे,
पण कलिकाले ते बधा तुजमां समाया कहुं खरे,
छे नेरनो तुं नाथ तारी पेर जगमां ना जडे,
श्री "मनोवांछित" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१०६]

चिंतामणी चिंता हवे एवी प्रतिष्ठा आपनी,
समृद्धि आपे पाप कापे ए नामना तुज जापनी,
नासिक तीर्थे नीलवर्णा नेत्र दिपक छो तमे,
श्री "चिंतामणी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१०७]


मुंबइ नगरीनी सिद्धिने समृद्धिना जे मूल छो,
मुज आतमानी सिद्धि काजे जे प्रभु अनुकुल छे,
तुज मिलननी आशा महीं मन माहरु व्याकुल छे,
श्री "गोडीजी" प्रभु पार्श्वने भावे करुं हुं वंदना ... [१o८]