Personal menu
Search
You have no items in your shopping cart.
Library > आरती और मंगल दीपक
मंगल दीवो

दीवो रे दीवो प्रभु मंगलिक दीवो
आरति उतारण बहु चिरंजीवो .... दीवो १
सोहामने घेर पर्व दिवाळी
अंबर खेले अमरा बाळी .... दीवो २

जय जय आरती आदि जिनंदा

जय जय आरति आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नंदा ।।1।।
पहेली आरति पूजा कीजे, नरभव पामीने लाहो लीजे 
दुसरी आरति दीन दयाला, धुळेवा मंडपमां जग अजवाळा 
तीसरी आरति त्रिभुवन देवा, सुरनर इन्द्र करे तोरी सेवा 

श्री नमिनाथ आरती

श्री नमिनाथ जिनेश्वर प्रभु की, आरति है सुखकारी।
भव दुःख हरती, सब सुख भरती, सदा सौख्य करतारी।।
प्रभू की जय ............. ।। टेक।।
मथिला नगरी धन्य हो गई, तुम सम सूर्य को पाके,

चौबीसों भगवान की आरती

करहूं आरती आज जिनेश्वर तुम्हरे द्वारे;
कर दो भव से पार लगा दो नैया किनारे,
ऋषभ अजित सम्भव जिन स्वामी;
अभिनन्दन भगवान लगा दो नैया किनारे,

आरती पंचपरमेष्ठी की

इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।। टेक।
पहली आरती श्री जिनराजा, भवदधि पार उतार जिहाजा।।
इहविधि मंगल आरती कीजै, पंच परमपद भज सुख लीजै।।
दूसरी आरती सिद्धन केरी, सुमरन करत मिटै भव फेरी।।

महावीर प्रभु के निर्वाण की आरती

जय जय जिनराया, स्वामी जय जय जिनराया । 
आरति करूं मन भाया, होय कंचन काया ॥ जय जय ॥
जय जगदीश्वर, अति अलवेशर, वीर प्रभुराया 
पतितउधारण, भव भय भंजन, बोध बीज दाया ॥ जय 1॥ 

“निर्वाण कल्याणक आरती"

जय जगदीश्वर अति अलवेसर वीर प्रभु राया 
पतित 'उद्धरण भव भय भंजण बोध बीज पाया 
जय जय जिन राया, आरती करूं मन भाया, 
होय कंचन काया जय जय जिन राया। 

दीपावली की आरती

जय जय जगदीश जिनेसर जग तारन राजा 
धन धन किरति तेरी इन्द्र करत बाजा 
जय जय अविकारा तुम जग आधारा 
आरती अमर उतारा भव आरती टारा। जय... 

जैन दिवाली पूजन
जैन दिवाली पूजन

स्वः श्रियम् श्रीमद्ऽर्हन्तः, सिद्धाः सिद्धि पुरीपदम् । 
आचार्या : पंचाचार, वाचकां वाचनां वराम् ।।1।। 
साधवः सिद्धि साहाय्यं, वितन्वन्तु विवे किनाम् । 
मंगलानां च सर्वेषां, आद्यं भवति मंगलम् ||2||