Personal menu
Search
You have no items in your shopping cart.
Library > आरती और मंगल दीपक
अथ परमर्षि स्वस्ति मंगल पाठ

नित्याप्रकंपाद्भुत-केवलौघा: स्फुरन्मन:पर्यय-शुद्धबोधाः|
दिव्यावधिज्ञान-बलप्रबोधा: स्वस्ति-क्रियासु: परमर्षयो नः ॥1॥
कोष्ठस्थ-धान्योपममेकबीजं संभिन्न-संश्रोतृ-पदानुसारि।
चतुर्विधं बुद्धिबलं दधाना: स्वस्ति-क्रियासु: परमर्षयो नः ॥2।

२४ तीर्थंकर स्वस्ति पाठ

श्री वृषभो नःस्वस्ति, स्वस्ति श्री अजित :!
श्री सम्भव: स्वस्ति, स्वस्ति श्री अभिनन्दन :!
श्री सुमति: स्वस्ति,स्वस्ति श्री पद्मप्रभ :!
श्री सुपार्श्रःस्वस्ति, स्वस्ति श्री चन्द्रप्रभ :!

पूजा विधि प्रारम्भ

ॐ जय! जय! जय!।
नमोडस्तु! नमोऽस्तु! नमोऽस्तु॥
णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं।
णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं ।

विनय पाठ

इह विधि ठाडो होए के, प्रथम पढ़े जो पाठ।
धन्य जिनेश्वर देव तुम, नाशे करम जु आठ।|1।।
अनंत चतुष्टय के धनी, तुम ही हो सिरताज।
मुक्ति-वधु के कन्त तुम, तीन भुवन के राज॥2।।

दशलक्षण-धर्म पूजा(कविश्री द्यानत ...

             (अडिल्ल छन्द)

उत्तमछिमा मारदव आरजव भाव हैं,
सत्य शौच संयम तप त्याग उपाव हैं।
आर्किंचन ब्रह्मचर्य धरम दश सार है,
चहुँगति दुःख तें काढ़ि मुकति करतार हैं।।
ॐ हीं श्री उत्तमक्षमादि-दशलक्षणधर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट!

             (आह्वाननम्)

ॐ हीं श्री उत्तमक्षमादि-दशलक्षणधमीअत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः...

श्री जिनवाणी माता की आरती

ॐ जयजिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता,
तुमको निशदिन ध्यावे, सुरनर मुनि ज्ञानी॥। टेक।।
श्री जिनगिरिथी निकसी, गुरु गौतम वाणी,
जीवन भ्रम तम नाशन, दिपक दरशाणी।।ऊँजय।।

ॐ जयजिनवाणी माता

ॐ जयजिनवाणी माता, ऊ जय जिनवाणी माता,
तुमको निशदिन ध्यावे, सुरनर मुनि जञानी॥ टैक।
श्री जिनगिरिथी निकसी, गुरु गौतम याणी,
जीवन भ्रम तम नाशन, दिपक दरशाणी ॥ॐजय॥


श्री पद्मप्रभु का आरती (बाड़ा)

करूँ आरती बाड़ा के श्री पद्मप्रभु के चरणों की।
दुख विनाशाये सुख उपजावे बेड़ी काटे कर्मों की।।
नींव खोदत प्रकट भये प्रभु इस बाड़ा की भूमी से।
चमत्कार दिखलाया ऐसा संकट हरता रोगी से।

जय चंद्रप्रभु देवा

जय चंद्रप्रभु देवा, स्वामी जय चंद्रप्रभुदेवा।
तुम हो विघ्न विनाशक स्वामी, तुम हो विघ्न विनाशक स्वामी
पार करो देवा, स्वामी पार करो देवा।।
जय चंद्रप्रभु देवा ...

महावीर स्वामी की आरती

जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो।
कुंडलपुर अयतारी, त्रिशलानंद विभो॥ ॥ ऊ जय ..... ।।
सिद्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी, स्वामी वैभव था भारी।
बाल ब्राह्मचारी व्रत पाल्यो तपधारी।। ॐ जय ..... ।।