Personal menu
Search
You have no items in your shopping cart.
Library > आरती और मंगल दीपक
पंच परमेष्ठी की आरती

यह विधि मंगल आरती कीजै,
पंच परम पद भज सुख लीजै।
प्रथम आरती श्री जिनराजा,
भवदधि पार उतार जिहाजा॥ यह विधि॥


चौबीस भगवान् की आरती

ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म सुपार्श्व की जय।
महाराज की श्रीजिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय।
चंद्र पुष्प शीतल श्रेयांस, वासुपूज्य महाराज की जय।
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय।

चौबीस भगवान् की आरती

ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म सुपार्श्व की जय।
महाराज की श्रीजिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय।
चंद्र पुष्प शीतल श्रेयांस, वासुपूज्य महाराज की जय।
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय।


पहीली माझी आरती कैलास गिरीला

पहीली माझी आरती कैलास गिरीला
पहीली माझी आरती कैलास गिरीला।
आदिनाथ भगवंताला करूया आरती।
दूसरी माझी आरती सम्मेद गिरीला।

जय आदिनाथ स्वामी

जय आदिनाथ स्वामी, बाबा जय आदिनाथ स्वामी।
जय आदिनाथ स्वामी, बाबा जय आदिनाथ स्वामी।
दुखहारी सुखकारी तुम हो, दुखहारी सुखकारी तुम हो
त्रिभुवन के स्वामी, त्रिभुवन के स्वामी

जय जय आरती आदि जिणंदा

जय जय आरती आदि जिणंदा जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः॥
पहेली आरती पूजा कीजे, नरभव पामीने लाहो लीजे,
जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥१॥


यह विधि मंगल आरती कीजे

यह विधि मंगल आरती कीजे, पंच परम पद भज सुख लीजे।
पहली आरती श्री जिनराजा, भव दधि पार उतार जिहाजा।
यह विधि मंगल आरती कीजे, पंच परम पद भज सुख लीजे
दूसरी आरती सिद्धन केरी, सुमरण करत मिटे भव फेरी।

श्री मंगळ चार

चारो मंगळ चार, आज म्हारे चारो मंगळ चार,
देख्यो दरस सरस जिनजीको, शोभा सुंदर सार. आज०१
छिनुं छिनुं छिनुं मन मोहन चरचो, घसी केशर घनसार. आज०२
विविध जातिके पुष्प मंगावो, मोगर लाल गुलाब. आज०३

श्री मंगलदीवो

चारो मंगल चार, आज घेर प्रभुजी पधार्या,
पहेले मंगळ प्रभुजीने पूजुं, घसी केसर घनसार, आज०
बीजे मंगळ अगर उखेवुं, कंठ ठबुं फूलहार, आज०
त्रीजे मंगळ आरती उतारुं, घंट बजावुं रणकार, आज०

चोवीश तीर्थंकरनी आरती

जयदेव जयदेव, जय जय जिनचंदा, प्रभु० (२)
परम महेश्वर देवा, (२) अमृत सुखकंदा. जयदेव०१
आदीश्वर जिनराज, सुनंदा स्वामी; प्रभु० (२)
अजित अचळपद पाम्या, (२) संभव गुणग्रामी. जयदेव०२