रीझो रीझो श्री वीर देखी, शासनना शिरताज;
हरखो हरखो आ मोसम आवी, पर्व पर्युषण आज.
रीझो ...
प्रभुजी देवे पर्षदा मांहे, उत्तम शिक्षा एम,
आळसमां बहु काळ गुमाव्यो, पर्व न साधो केम.
रीझो ...
सोनानो रजकण संभाळे, जेम सोनी एक चित्त,
तेथी पण आ अवसर अधिको, करो आतम पवित्र
रीझो ...
जेने माटे निशदिन रखडो, तजी धरम ना नीम,
पाप करो तो शिर पर बोजो, ए तो व्याजबी केम.
रीझो ...
कोई न लेशे भाग पापनो, धननो लेशे सर्व,
परभव जाता साथ धर्मनो, साधो आ शुभ पर्व.
रीझो ....
संपी ने समता ए सुणजो, अठ्ठाई व्याख्यान,
छठ्ठ करजो श्री कल्पसूत्रनो, वार्षिक अठ्ठम जाण.
रीझो ...
निशीथसूत्रनी चूर्णि मांहे, आलोचना वखणाय,
खमीए होंशे सर्व जीवने, जीवन निर्मळ थाय
रीझो ...
उपकारीश्री प्रभुनी कीजे, पूजा अष्ट प्रकार,
चैत्य जुहारी गुरू वांदीजे, आवश्यक बे काळ.
रीझो ...
पौषध चोसठ प्रहरी करतां, जाये कर्म जंजाळ,
पद्मविजय समता रस झीले, धर्म मंगल माळ.
रीझो ...
Source: Paryushan | Stavan


