धन्य धन्य अंगार (२)
जिनशासन श्रुंगार,
धन्य धन्य अंगार
शौर्य धैर्य गंभीर वीरनों,
तू अकूट भंडार
निर्मत्वने सत्वतत्त्वनों,
तू एकज आगार (२)
निरशक्त तू निरलंब तू,
निराकार मनोहार
तुझथी मारो निस्तार,
धन्य धन्य अंगार
तुझथी मारो निस्तार,
धन्य धन्य अंगार
धन्य धन्य अंगार (२)
जिनशासन श्रुंगार,
धन्य धन्य अंगार
तू श्रेय का निर्माण छे,
तू ब्रह्मणु धाम छे,
तू निरागी निष्काम छे,
मंगलकारी तुझ नाम छे
तुझ जगने जनवलाड़,
तू पृथ्वी नो बलकार
तू अवनि नो आधार,
तू सृष्टि नो श्रुंगार
तू भवरण मा विश्राम,
धन्य धन्य अंगार
तू पार्च नो ममता,
धन्य धन्य अंगार
धन्य धन्य अंगार (२)
जिनशासन श्रुंगार,
धन्य धन्य अंगार
सद्भाव नो स्पंदनवन तू,
गुणसुवास नो चंदनवन तू,
जन जन माटे नंदनवन तू,
ने वीतराग नो वृंदावन तू (२)
तू नंदभद्र इतकार,
धन्य धन्य अंगार
तू सर्व तीर्थ नो सार,
धन्य धन्य अंगार
धन्य धन्य अंगार (२)
जिनशासन श्रुंगार,
धन्य धन्य अंगार
आत्म नो हितकार,
धन्य धन्य अंगार
सोहे सत्व वार,
धन्य धन्य अंगार
अहो भव्य देदार,
धन्य धन्य अंगार
वहे महाव्रत भार,
धन्य धन्य अंगार
जीवंत गुरु भंडार,
धन्य धन्य अंगार
धरे शुद्ध श्रुंगार,
धन्य धन्य अंगार
गुणिजन मा शिरदार,
धन्य धन्य अंगार
हैयानो उदगार,
धन्य धन्य अंगार
धन्य धन्य अंगार (२)
जिनशासन श्रुंगार,
धन्य धन्य अंगार
Source: Prachi Jain


