जल पूजा जुगते करी मेल अनादि विनाश
जल पूजा फल मुज होजो मांगु ऐम प्रभु पास


मेरू शिखर न्हवरावे हो सुरपति
मेरु शिखर न्हवरावे
जन्म काल जिनवरजी को जाणी
पंच रूपे हरि आवे हो सुरपति
मेरू शिखर न्हवरावे


देवो रे नाचे देवेंद्र नाचे
देवो रे नाचे थनमन आज
जय जय हो प्रभुनो जय जय हो (4)
पंचरूप धरी मेरुगीरिए
सौधर्म इन्द्र लावे
एक क्रोड साठ लाख कलशे
प्रभुजीने नवरावे
हैयामां बसीया मनडामा बसीया
हैयामां वसीया व्हाला जिनराज
जय जय हो प्रभुनो जय जय हो (2)


शोभे छे पांडुकवन
सोनानु सिंहासन
ईशान ईन्द्रना खोले
मलके हे भगवन
वृषभ रूप करी
शृंग जले भरी
सौधर्म इन्द्र
नवरावे मन भरी
तारी आगल प्रभु
हुं तो जेवो पशु
तोए बिन छु तारा
हुं चरणे वसु
बाजे शहनाईयाँ
बाजे बासुरीयाँ
प्रभु जन्मकल्याण आज रे
नाचे छे सुरवररीयाँ (2)


कोई गंगा कोई सिंधु
क्षीरोदधि जल लाओ रे
सोने के कलशो को लेके (2)
प्रभुजी ने न्हवरओ रे
जन्म महोत्सव करने
मेरु गिरी चालो (2)
घंट नाद बजाओ
देव देवी मिल आओजन्म
 महोत्सव में चालो रे चालो ...
चालो रे चालो रे मेरुगिरि पर चालो (2)


झनन झनन झन झन झन झांझर बाजे रे
घणण घणण घण घण-घण घंटा गाजे रे (2)
तीन भुवन के दिनकर बनकर आए है
इस धरती पर नई रोशनी लाए है (2)
बहती है शिर पर से
पवित्र जल की धारा
भक्ति में भींगे हो के तुम
जीवन कर दो न्यारा
मलक रहे है मेरुगिरि पर
तीर्थंकर प्रभु प्यारे
लगता है जैसे मुखड़े पर बैठे
चाँद सितारे
नाचो गाओ (2)
नाचो गाओ मेरे
प्रभुजी आए है


उजलो उजवो कल्याणक उजवो (2)
कल्याणके आनंद थाये हो हो हो
गगन ने धरती केरा
कणकण महेकी उठ्या
रात्री होता छता ए
पंखीओ चहेंकी उठ्या
अंधारा दूर थयाने
अजवाला चमकी उठया
दुःखो सह दूर गयाने
नारक पण हरखी उठाया
विश्वकल्याण नाथनुं
कल्याणक उजवो
महाराजाना कुलदिपकनो
जन्महोत्सव उजवो
उजवो उजवो कल्याणक उजवो (2)



सहु चालो रे चालो
सहु मेरुगिरि पर चालो (2)
एक-दो-तीन चार
बोलो प्रभुनो जय जयकार (2)
कोई क्षीरोदधि जल लावो
पंचवर्ण फूल थाल लावो
अगर चंदन ना धूप प्रगटावो
प्रभुनी करीओ भक्ति
प्रभु आपे मुक्ति
वीतरागी प्रभु
सहुने व्हालो व्हालो
सहु चालो रे चालो
सहु मेरु गिरि पर चालो (2)


आज नाचो झूमो गावो
आनंदो हरखावो
प्रभु जन्म हुआ है
आज हरखी धरा है (2)
हरखी रही देखो स्वर्गपुरी
आनंदे झूमे देवदेवी
रंगराग की दुनिया छोड़ के
मेरु पर्वत आये दौड़ के
में पहला पहोचुंगा
भक्ति में झूमुंगा
प्रभु जन्म हुआ है
आज हरखी धरा है (2)



कालिकाले कल्पतरु
तीर्थंकर भगवान (2)
सकल कार्योंमां मंगल करू
तीर्थंकर भगवान (2)
सरसर बहेती खलखल करती
जलधारा मनोहारा
टन टन टन छन छनन छन
कलशानो रणकार
अभिषेक अमृत अमहरू
तीर्थंकर भगवान (2)
कलिकाले कल्पतरु
तीर्थंकर भगवान (2)
सकल कार्योमा मंगल करू
तीर्थंकर भगवान (2)


Source: Darshan Shah