रहेशे मारा श्वासे, आजीवन तारुं स्थान,
कारण के तारा शिखरे शोभे भगवान
रहेशे मारा श्वासे, आजीवन तारुं स्थान,
कारण के तारा शिखरे शोभे भगवान
गिरिराजनी गाथा छे, ए भाग्यविधाता छे,
ए मारो प्रियतम छे, तेथी सुखशाता छे
हैये पीपासा छे, आंखोमां आशा छे,
प्रियतमनी वातो माटे, प्रेमभीनी भाषा छे ...
रहेशे मारा श्वासे, आजीवन तारुं स्थान,=
कारण के तारा शिखरे शोभे भगवान



वरसोथी रोज मळु छुं, तो य नवो लागे,
मळवा ना आवुं त्यारे सपनामां जागे
अधखुली पांपण पण कहेती हे चरण चालो,
डगलुं भरुं त्यां आखो रस्तो सूझाडे छे,
थाक ना लगाडे तेवो साथ ए बताडे छे
रहेशे मारा श्वासे, आजीवन तारुं स्थान,
कारण के तारा शिखरे शोभे भगवान


पेली रूपेरी आंगी जय तळेटी छे,
गिरिवरनां ए चरणोमां दुनिया लेटी छे,
उगमणी दिशामां जेवो सूर्य-उदय थातो
सरितानां पाणी एनां अंगने पखाळे छे,
सूरजने चंदा एनो चहेरो उजाळे छे
रहेशे मारा श्वासे, आजीवन तारुं स्थान,
कारण के तारा शिखरे शोभे भगवान

Source: Jaydeep Swadia