सुख दुःख झूठा
धन भी झूठा
झूठी मोहमाया
सच्चा मनका
वो को न जहाँ
प्रभु रतन पाया
प्रभु रतन पाया 



हो ... भक्त ये कमाल के
भक्ति भी कमल की (२)
लगा रंग भक्ति का
हुई मै कमल की
पायो रे पायो रे पायो रे पायो रे पायो (3)
प्रभु रतन धन पायो (२)
रूत मिलान की लायो
प्रभु रतन
प्रभु रंग रंगायो मैंने
प्रभु रतन धन पायो



क्या में दिखादू या मै छुपालू
जो मूरत मन में
देख के मूरत बजने लगे है
सरगम सी तन में]
खुशियां है हर मन में
जीवन मैं आए मेरे
रंग ते गुलाल की
लगा रंग भक्ति का
हुई मैं कमाल की
पायो रे पायो रे पायो रे पायो रे पायो (3)
प्रभु रतन धन पायो (२)
मन गगन बन्न चयो
प्रभु रतन
प्रभु रंग रंगायो मैंने
 प्रभु रतन धन पायो


मुझको थे घेरे जितने अँधेरे
हो गयी दूर सभी
प्राची प्रभु चरणों में आकर
हो गयी धन्य तवी
प्रेम की ज्योति जगी
गिरी जब जब भी में
प्रभु ने संभाल की
लगा रंग भक्ति का
हुई में कमाल की
पायो रे पायो रे पायो रे पायो रे पायो (3)
प्रभु रतन धन पायो (२)
आज मन भर आयो
प्रभु रतन
प्रभु रंग रंगायो मैंने
प्रभु रतन धन पायो

Source: Prachi Jain