यहाँ वहाँ सारा जहाँ देख लिया पर
जैन धर्म सा धर्म नहीं है
यूँ तो जग में कई पर्व हैं पर
पर्युषण जैसा कोई पर्व नहीं
जहाँ क्षमा पाना हो
पापों का नाश हो
गुरुओं का ज्ञान हो
और बढ़े मन का संयम
पर्वों का यह राजा है जो
खोलता मुक्ति के द्वार को
यह पर्व महान
जैनों की यह शान
पर्युषण महान

जय जिनशासनम्
जय जिनशासनम्
जय जिनशासनम्

राग द्वेष को त्यागना है और
समता को अपनाना है
अहिंसा परमो धर्म का झंडा
घर घर में फहराना है
देना है संदेशा जीव दया का जन जन को
सफल करे इस जीवन को
सबके मन में बढ़े भक्ति भाव
यह पर्व महान
जैनों की यह शान
पर्युषण महान

Source: Dhairya Rathod