Monday, 12 October, 2026
ॐ जयजिनवाणी माता, ऊ जय जिनवाणी माता,
तुमको निशदिन ध्यावे, सुरनर मुनि जञानी॥ टैक।
श्री जिनगिरिथी निकसी, गुरु गौतम याणी,
जीवन भ्रम तम नाशन, दिपक दरशाणी ॥ॐजय॥
कुमत कुलाचल चूरन, वज्र सम सरधानी।
नव नियोग निक्षेपन, देखत दरपानी ॥ऊजय॥
पातक पंक पखालन, पुन्य परम दाणी।
मोह महार्णव डूबता, तारन नौकाणी।।ॐजय॥
लोका लोक निहारन, दिव्य नयन स्थानी।
निज पर भेद दिखावन, सुरज किरणानी ॥ऊ जय॥
श्रावक मुनिगण जननी, तुम ही गुणखानी।
सेवक लख सुखदायक, पावन परमाणी।ऊजय॥
ॐ जय जिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता,
तुमको निश दिन ध्याये, सुरनर मुनि ज्ञानी।।


