देवो पन तारा चरणोमा
भक्ति थी शीश नमावे छे
ए सिंहासन छोड़िने
आजे धरती पर आवे छे

आजे वसुधा आखा जगतने तारो महिमा कही रही
धर्मनगरमा धीमी रे धीमी त्यागनी धारा वही रही
जल तरंगम बाजे मधुरम
आजे संयमनो सुर सजे
जल तरंगम बाजे मधुरम
आजे संयमनो सुर सजे
नरनार कहे सौभाग्यवती तू,
आयो संयमरथ आजे
महासारथी नो शुभ योग थयो रे,
पायो परम पंथ आजे

हो संयम धरा पर तारा चरण छे
हाथोमा सुंदर रजोहरण छे
तने निहाली हैया सहुना ठरे
संयम दिवानी ज्योति बने तू
श्रमणी गणनु मोती बने तू
साधक थईने भवनो समंदर तरे
तारा त्यागनी वैरागनी मंगल भेरी बाजे
तारा त्यागनी वैरागनी मंगल भेरी बाजे
तू रजोहरणने अवधारिने नृत्य करे आजे
तू रजोहरणने अवधारिने नृत्य करे आजे

देवो पन तारा चरणोमा
भक्ति थी शीश नमावे छे
ए रयण सिंहासन छोड़िने
आजे धरती पर आवे छे

नरनार कहे सौभाग्यवती तू,
आयो संयमरथ आजे
महासारथी नो शुभ योग थयो रे,
पायो परम पंथ आजे

जिनशासन दरबारे रमती, सर्वविरति ताज धरंती,
संयमनो जयकार करंती, ओघो लईने तू थनगनती
ओघो लईने तू थनगनती
पापोनी सामे गरजंती, सत्व अने सन्मार्ग धरंती
कर्मो सामे जंग करंती, ओघो लईने तू थनगनती
ओघो लईने तू थनगनती
तारा नैने नूर छलो छल, बहु वैरागनुपूर छलो छल
महावीरशमनं तू करती, ओघो लईने तू थनगनती
ओघो लईने तू थनगनती

होजो तारो जय जयकार, दीक्षार्थी तारो जय जयकार
होजो तारो जय जयकार, दीक्षार्थी तारो जय जयकार

अनुकूलतानो राग तजीने, संयमनो महासाज सजीने
गुरुकुल वासे तू संचरती, ओघो लईने तू थनगनती
ओघो लईने तू थनगनती
जयनां सैयर संगे रमती, सौजीवोने अभय धरंती
त्याग तपस्या रंग धरंती, ओघो लईने तू थनगनती
ओघो लईने तू थनगनती
लागो आखो आज हरखाती, अक्षतनी वर्षा वर्षाती
धन्य बनी आजे आधारती, ओघो लईने तू थनगनती
ओघो लईने तू थनगनती

होजो तारो जय जयकार, दीक्षार्थी तारो जय जयकार
होजो तारो जय जयकार, दीक्षार्थी तारो जय जयकार

Source: Sani Shah