महावीर ने वाते मानीने
दिव्य ज्योति ने जलकावे
गुरु आना ने चित्त धारण
विमल भावो ने छड़कावे
रजोहरण ना रंगे रमे छे
कष्टो सगला केवा खामे छे ...
सर्वे जीवो ने अभय देनारा

एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन श्रृंगार एवा अंगार अमारा
एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन श्रृंगार एवा अंगार अमारा

ए तो सुयोग ना साथवारे,
संयम नी सोधम महकावे
ए तो सुयोग ना साथवारे,
संयम नी सोधम महकावे
जिनवर ना आर्य बनी ने
शास्त्रो थी आत्म रंगावे
औदार्य गुण अवधारीने,
बने दुनिया थी अलगारी जे
सिंहसत्त्व थी जीवन ने जीव नारा

एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन श्रृंगार एवा अंगार अमारा
एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन सितारा एवा अंगार अमारा

ए तो आत्म ने श्रृंगारवा,
शील संयम ने आंगी रचावे
वली करेंमिभांते उच्चारिने
महाव्रतो नी आंगी सजावे
एना ममता मन थी मरे छे
ने समता दिल मा धरी छे
प्रभु ना पंथे मोक्ष ने पाम नारा

एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन श्रृंगार एवा अंगार अमारा
एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन सितारा एवा अंगार अमारा

एवा लागे प्यारा मने
जोता हायू नमि चाहे
आनंद थी अहोभावे
उजड़े वेषे सोहे
वीर ना आदेशे मोहे
अंकित थया मनोभावे (2)

एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन श्रृंगार एवा अंगार अमारा
एवा अंगार अमारा, एवा अंगार अमारा
जिनशासन श्रृंगार एवा अंगार अमारा

Source: Sani Shah