एक जनम्यो राज दुलारो
दुनिया नो तरन हारो
वर्धमान नु नाम भारी
ने प्रगत्पो तेज सितारों र।।
अवनि पर थी अन्धकार ना
वादल जाने विखराय (2)
गाये उमरें होहो.(2)
गये उमंगे गीत अप्सरा,
देवो ना मन हरखाया (2)
नारकी ना देवो ए निरख्ो
लेज तनो चभकारो र।।

एक जनम्यो राज दुलार

धान वा्या घरती ना पेटे
नीर वाद सरवरिया ना (2)
चंद्र सूरज ना तेज वाथ ने
सांप वाथ सो मनाव मोँ (2)
दुःख ना दिवसों दवूर तय ने
आव्यो सुख ने वारो रे।।

एक जनम्यो राज दुलारो

रंकजनों ना दिल्त माँ प्रसारय
आश परेलू अजवाडु (2)
देली आव्यो होहो ..
देली आव्यो दिन दुखिया नो
रहेशो ना कोई नेंधारु (2)
भीड़ जगत नई भांगे इदो
सो नो पालनहारों रे।।

एक जनम्यो राज दुलारो

वागे छे शरणाई खुशी नई
सिद्धार्थ नो आगनिये (2)
हेते हीकोते शिशला रानी
वाल कुंवर ने पारणिये (2)
प्रजा बानी छे आनंद- घेली
घर पर उत्लक न्यारो रे।।

एक जनम्यो राज दुलारो

दुनिया नो तरना हारो
वर्धमान नु नाम भारी
ने प्रगत्थो तेज सितारों र।।


Source: Nikesh Sanghvi