आनंद रंग .. भगवंत संग .. अनहद उमंग उपजायो,
अम अंग अंग .. सागर तरंग .. उछरंग सुमंगल पायो,
गुणगान प्रभुना .. सूरतालमां ... अद्भूत अनुपम छायो,
नेमिनाथ मंदिरे ... मनोहर ... नेमिनाथ मंदिरे !!.... 1


आंगी केवी जाजरमान ... शोभे जाणे देवविमान,
दीवे दीवे सोनेरी ... ज्योति करती नर्तन गान,
आ पुण्य अमारा जाग्यां केवा !... भाग्य फळ्यां छे केवा!,
जे शक्ति मळी छे तेना योगे ... करीए उत्तम सेवा .... गुणगान प्रभुना ... नेमिनाथ मंदिरे !!... 2


सुखकारण दुःखवारण छे ... जिनराया भवतारण छे. भयहारण मदमारण छे ... नेमिनाथ गुणधारण छे,
जे भक्ति करी ते ओछी लागे ... जागे नित नित प्रीति,
अम अंतर आ हमेशां गातुं ... परम प्रभुनी गीति ...
गुणगान प्रभुना ... नेमिनाथ मंदिरे ...!! 3



Source: Paras Shah | Bhavana Kalyanak