पर्व पर्युषण आया रे जग में,
छाया है भक्ति का रंग
क्षमापना का यह है महोत्सव,
लाया ख़ुशी की तरंग (2)
प्रभु भक्ति से गुरु भक्ति से
खिली आत्मा की फुलवारी
सजा घर आंगन, झूमें यह तन मन
यह तो घड़िया है मंगलकारी
आया आया देखो आया,
जैनों का पर्व हुआ,
केसरिया आज जग सारा (2)
मन में उमंग है, झूमे गगन
स्वर्ग का जैसे हो यह नज़ारा (2)
देवता आये अम्बर से देखने,
तीनों लोकों में खुशियां हैं छाई
सभी भक्तों ने जिनवर के नाम की,
अपने हाथों में मेहंदी रचाई (2)
आया आया देखो आया,
जैनों का पर्व हुआ,
केसरिया आज जग सारा (2)
मन में उमंग है, झूमे गगन
स्वर्ग का जैसे हो यह नज़ारा (2)
सत्य अहिंसा का यह महापर्व है.
जीवदया यह हमको सिखाए
माफ करने का संदेशा देता है यह,
सभी पापों से मुक्ति दिलाए (2)
ध्वजा शासन की, जिनशासन की
ऊँचे आकाश में लहराई
सजा घर आंगन, झूमें यह तन मन
यह तो घड़िया है मंगलकारी
आया आया देखो आया,
जैनों का पर्व हुआ,
केसरिया आज जग सारा (2)
मन में उमंग है, झूमे गगन
स्वर्ग का जैसे हो यह नज़ारा (2)
Source: Dhairya Rathod


